राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस में बड़ा खुलासा! पहले से थी गड़बड़ी की जानकारी, फिर भी जिम्मेदार क्यों रहे खामोश? SIT रिपोर्ट में कई गंभीर सवाल

अयोध्या: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच में कई अहम तथ्य सामने आए हैं। विशेष जांच दल (एसआईटी) की प्रारंभिक रिपोर्ट में सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी से जुड़ी गंभीर चूकें उजागर हुई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, चढ़ावे में गड़बड़ी के संकेत पहले ही मिल चुके थे और बैंक अधिकारियों ने इस संबंध में जानकारी भी दी थी, लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदार स्तर पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।

एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में उल्लेख किया है कि निर्धारित सुरक्षा उपायों का पालन सुनिश्चित करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों की गंभीर पर्यवेक्षणीय चूक के कारण आरोपित कर्मचारियों का मनोबल बढ़ा और वे आपराधिक कृत्य को अंजाम देने में सफल रहे।

बहुमूल्य चढ़ावे के प्रबंधन में भी मिलीं खामियां

प्रारंभिक रिपोर्ट में केवल नकदी गणना प्रक्रिया ही नहीं, बल्कि बहुमूल्य वस्तुओं के रखरखाव और प्रबंधन में भी कई प्रणालीगत कमियों की ओर संकेत किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, हुंडियों से प्राप्त आभूषणों और अन्य मूल्यवान वस्तुओं का रजिस्टर तो रखा जाता था, लेकिन पहली बार अलग करते समय उनका तत्काल वजन, फोटोग्राफी और सीलिंग जैसी प्रक्रियाओं का एक समान पालन नहीं किया गया।

रिपोर्ट में यह भी सवाल उठाया गया है कि इन कमियों की जानकारी होने के बावजूद संबंधित जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

छह दिन तक चली पूछताछ, फिर सामने आई शुरुआती रिपोर्ट

राज्य सरकार के निर्देश पर एसआईटी ने 15 जून से जांच शुरू की थी। छह दिनों तक ट्रस्टियों, मंदिर प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों, नकदी गणना में शामिल कर्मचारियों, दान में मिले आभूषणों के रखरखाव से जुड़े लोगों और बैंक अधिकारियों से पूछताछ की गई।

साक्ष्यों, दस्तावेजों और निरीक्षण के आधार पर तैयार प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद 25 जून को आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। मामले की पुलिस जांच जारी है, लेकिन पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारियों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

एसओपी बनी, लेकिन पालन नहीं हुआ

जांच में सामने आया कि नकदी गणना और दान प्रबंधन के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार की गई थी, जिस पर ट्रस्टी और तत्कालीन बैंक प्रबंधक के हस्ताक्षर भी थे। दानपेटियों को खोलने और नकदी की गणना के लिए एक एजेंसी नियुक्त की गई, लेकिन कर्मचारियों के चयन और प्रक्रिया के पालन में कई स्तरों पर लापरवाही सामने आई।

एसआईटी के अनुसार, इसी वर्ष 15 अप्रैल को नियुक्त एक कर्मचारी पर गणना प्रक्रिया से जुड़ने के बाद चोरी में शामिल होने के आरोप लगे।

सीसीटीवी और सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठे सवाल

रिपोर्ट में कहा गया है कि गणना कक्ष में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे, लेकिन उनकी नियमित निगरानी और संचालन की प्रभावी जांच नहीं की गई। पुलिस को कैमरों का एक्सेस मिलने के बावजूद किसी संभावित गड़बड़ी की सूचना साझा नहीं की गई।

इसके अलावा, परिसर में लंबे समय तक तैनात तकनीकी अधिकारी की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठे हैं। जांच में यह भी सामने आया कि दान में मिले आभूषणों के रिकॉर्ड और उनके स्वरूप के प्रबंधन में लापरवाही बरती गई, जबकि संबंधित कर्मचारियों से पूछताछ के बावजूद अब तक कार्रवाई नहीं हुई।

सुरक्षा जांच में भी बरती गई ढिलाई

एसआईटी ने सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, गणना कार्य से जुड़े कर्मचारियों को बिना तलाशी परिसर से बाहर जाने दिया जाता था। सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही बरतने वाले कर्मियों या इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

जांच में कई ऐसे नाम सामने आए हैं, जिनसे पूछताछ हुई, आरोप लगे और जांच शुरू हुई, लेकिन उनके खिलाफ अभी तक किसी प्रकार की प्रशासनिक कार्रवाई नहीं होने से पूरे मामले पर नए सवाल खड़े हो रहे हैं।

 

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